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बेबसी गरीबी बेरोजगारी ज़िन्दगी शायरी | Footpath Life Shayari

Footpath Life Shayari सड़क किनारे ज़िन्दगी

सड़क किनारे ज़िन्दगी

बेबसी का चादर ओढ़,
हर रोज़ लोग सो जाते हैं।
सड़क किनारे ज़िन्दगी का हाल,
आज तुम्हें सुनाते हैं।

बेबसी गरीबी बेरोजगारी ज़िन्दगी शायरी | Footpath Life Shayari

बेरोजगारी का दर्द शायरी | गरीबी और भुखमरी पर शायरी

उम्मीद का दामन फैलाकर,
बच्चे भीख माँग लाते हैं,
कुछ पैसों की ख़ातिर,
औरत को बलि चढ़ाते हैं।
भूख लगे शिद्द्त की,
पानी से भूख मिटाते हैं।
सिग्नल पे दौड़-दौड़ कर,
थोड़ा सामान बेच आते हैं,

बेरोजगारी पर कोटेशन | बेरोजगारी पर कविताएं

इंसान की क़दर कहाँ,
कौड़ियों के भाव लगाते हैं।
मॉल से महँगा ख़रीदकर,
सस्ता सड़क किनारे से ले आते हैं।

घटिया सोच पर शायरी | राजनीति शायरी

सरकारी कर्मचारी आकर,
इनकी कुटिया भी उखाड़ जाते हैं।
हाँ, बिल्कुल ऐसे ही साहेब,
सड़क किनारे ज़िन्दगी बिताते हैं।
सड़क किनारे ज़िन्दगी बिताते हैं।
Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar

सरकारें कर रही कोहराम, सरकार शायरी | सरकार पर व्यंग्य शायरी

ये सच है
रिश्तों से है गुलजार जिन्दगी ये सच है
सरकारें कर रही कोहराम ये सच है ।।
छल के बढते रहे बाजार ये सच है ,
मुनाफ़ा के फेर में लूट रहे ये सच है ।।

घटिया लोग स्टेटस

लफ्ज बिक रहे सरेआम ये सच है ,
जननी तार-तार हो रही ये सच है ।।
वर्गभेद बाँटता रहा राज ये सच है ,
कोई कर रहा नित पैरवी ये सच है ।।

घटिया लोगों पर विचार

बिक रहा सब जगह झूठ ये सच है ,
झूठा ही ठहरा समझदार ये सच है ।।
सच सिसककर टूट रहा ये सच है ,
गिरता कहर झूठ का सदा ये सच है।।
झूठ की चकाचौंध फैली है ये सच है ,
सच झुलस रहा चहूँ ओर ये सच है ।।
"वाग्वर" दम तोड़ रहा सच ये सच है,
खिलता गुलिस्तां सच का,ये सच है।।
विनोद कुमार जैन वाग्वर
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