नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आरती Maa Brahmacharini Ki Aarti
मां ब्रह्मचारिणी देवी को मां दुर्गा के दूसरे रुप में जाना जाता है। नवरात्री के दुसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी ने सौ सालों तक भगवान भोले नाथ को अपने वर के रूप में प्राप्त करने हेतु शाक एवं वृक्षों के पत्ते को खाकर कठोर तपस्या की थी। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना से जीवन में दृढ़ संकल्पी होने की प्रेरणा, तपस्या, ज्ञान संयम एवं त्याग की प्ररेणा मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी की आरती और भजन से इनको प्रसन्न किया जा सकता है। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर प्रस्तुत है मां ब्रह्मचारिणी की आरती और भजन।
हे माता ब्रह्मचारिणी! ब्रह्मचारिणी माता की आरती Brahmacharini Mata Ki Aarti
हे माता ब्रह्मचारिणी
(भक्ति गीत)
“मेरी ओर से सभी भक्तों को शारदीय नवरात्रि महोत्सव/महापर्व के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाईयां।”
हे माता ब्रह्मचारिणी, हे माता कर कमल धारिणी,
दायां हाथ जप की माला, बायां हाथ शोभे कमंडल।
लाल परिधान पसंद आपको, शांत आपका मुख मंडल,
अपर्णा, उमा नाम आपके, तप मध्य बसा करती जंगल।
हे माता ब्रह्मचारिणी………..
एक पुष्प मन को गुड़हल भावे, दूजा लाल रंग का कमल,
शिव के लिए तप किया, भोजन में कंद मूल और फल
पूजन में स्वीकार आपको, लाल पुष्प संग श्वेत चावल,
तप बल से हुई, महादेवजी की प्राप्ति में आप सफल।
हे माता ब्रह्मचारिणी………….
तपस्या देवी नाम आपका, मन में नहीं है कोई हलचल,
भोलेनाथ की संगिनी आप, जिसके जटा में बसे गंगाजल।
आपके पदार्पण से, जग में सब कुछ हो जाता निर्मल,
हे नारायणी जगत जननी, मन आपका है बड़ा शीतल।
हे माता ब्रह्मचारिणी……….
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)
जय जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता : नवरात्रि आरती भजन Navratri Aarti Bhajan
जय जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन को हैं भाती।
ज्ञान सभी को हैं सिखलाती।
ब्रह्मा मंत्र देवी को प्यारा।
जपे जिसे जग भर संसारा।
जय हे गायत्री वेद की माता।
निस दिन मन मेरा तुम्हें ही ध्याता।
कमी कोई न रहने पाए।
कोई भी दुख न सहने पाए।
विरति सबकी रहे ठिकाने।
तेरी जो महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की पावन माला ले कर।
मंत्र जपे तेरी श्रद्धा दे कर।
छोड़ के आलस करे गुणगाना।
मां तुम उसका करना कल्याण।
ब्रह्माचारिणी नाम तुम्हारा।
भक्त बहुत ही तुम्हें है प्यारा।
हम तेरे चरणों के पुजारी।
लाज रखो मेरी महतारी।
अरुण दिव्यांश
9504503560
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माॅं आदिशक्ति ब्रह्मचारिणी की आरती
शुभ नवरात्रि का द्वितीय दिवस,
माॅं आदिशक्ति के द्वितीय स्वरूप।
द्विभुजी श्वेत वस्त्रधारिणी माता,
अनंत शक्तिधारिणी निर्मल रूप।।
द्वितीय रूप में आईं आज माते,
कर्म धर्म लिए माता ब्रह्मचारिणी।
सदा शुभ फल माता हैं देनेवाली,
तपस्या में रत माता तपश्चारिणी।।
ब्रह्म का आचरण करनेवाली माॅं,
तप में रहनेवाली सदा माॅं लीन।
मातकृपा जिस भक्त पे है होती,
भक्त भी होते तब सदा भयहीन।।
विश्व पर कृपा तुम बरसाओ माॅं,
युद्ध पे लगाओ शीघ्र ही विराम।
विश्व में तुम सुख शांति ये दे दो,
सब पे कृपा बरसाओ अविराम।।
जय जय जय माता ब्रह्मचारिणी,
मम नमन करो माॅं तुम स्वीकार।
मन मस्तिष्क मेरा पावन कर दो,
जन जन से हमें मिलता रहे प्यार।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
डुमरी अड्डा
छपरा ( सारण )
बिहार।
नवरात्रि द्वितीय दिवस माँ ब्रह्मचारिणी देवी की आरती Maa Brahmacharini Ki Aarti
माँ का दूसरा आज रूप है,
नाम हुआ इनकी ब्रह्मचारिणी।
तप का आचरण करनेवाली,
नाम फैला जग में तपश्चारिणी।।
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से,
मुक्ति मिलती है आदि से।
जीवन होता निरोग स्वस्थ,
मुक्ति मिलती है व्याधि से।।
आज धूमधाम से पूरे विश्व में,
हो रही माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा।
भक्ति आराधना घण्टे करतल
ध्वनी से धरती से अंबर गूँजा।।
माता ब्रह्मचारिणी तपश्चारिणी को,
आओ हम सब मन से नमन करें।
रहें सदा हम तन मन से पवित्र,
हमारे अंदर बुराई कभी न गमन करे।।
अरुण दिव्यांश 9504503560
ब्रह्मचारिणी
विषयः नवरात्रि
विधाः पद्य
दिवसः मंगलवार
दिनांकः 27 सितंबर, 2022
शीर्षकः ब्रह्मचारिणी
आया है नवरात्रि का महीना,
माँ आदिशक्ति के दिवस सारे।
भक्तों को कल्याण करने हेतु,
नौ रूपों में माता देतीं इशारे।।
नवरात्रि का दूसरा दिवस आज,
माता का आज है दूसरा रूप।
मातृशक्ति से जो वंचित होते,
गिर जाते हैं वे पापों के कूप।।
माता विराजित दूसरे रूप में,
ब्रह्मचारिणी का रूप है आज।
एक हाथ कमंडल है शोभता,
दूसरे हाथ है माला का साज।।
गौरवर्ण में ही दिखती हैं माते,
होती हैं माँ ये पीताम्बर धारी।
कान्तियुक्त चमकता है चेहरा,
मोहिनी रूप बहुत सुन्दर प्यारी।।
तुम ब्रह्म का आचरण माँ करती,
तुम कहलाती हो ब्रह्मचारिणी।
ब्रह्म की तप में लीन रहनेवाली,
नाम पड़ा तब तेरो तपश्चारिणी।।
जय जय माँ तेरी ब्रह्मचारिणी,
जय जय हो माँ तेरी तपश्चारिणी।
तुम्हीं भक्तों को है सुख देनेवाली,
तुम्हीं भक्तों की दुःखनिवारिणी।।
जय जय माता भक्तों की देवी,
जय जय माता विन्ध्याचल रानी।
देव देवी भी तेरी पूजा हैं करते,
और साधु संत मुनि औ ज्ञानी।।
तुमको सदा ही नमन करूँ मैं,
चरणों में तेरे मेरा भी सुवास हो।
तन मन में स्फूर्ति शक्ति दे दो,
मेरी वाणी में भी तेरा ही वास हो।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना।
अरुण दिव्यांश।
मां ब्रह्मचारिणी के दोहे नवरात्रि पर विशेष प्रस्तुति
दोहे
(१)
मां दुर्गा का दूसरा, ब्रह्मचारिणी रूप।
तपश्चारिणी हैं यही, माता शक्ति स्वरूप।।
(२)
ब्रह्मचारिणी देवि की, महिमा अपरम्पार।
शक्ति संचरित कर रहीं, ऊर्जा की भंडार।।
(३)
ब्रह्म कमंडल से हुआ, माता का अवतार।
ब्रह्मचारिणी मां करें, सृजन, सृष्टि विस्तार।।
(४)
देवि अपर्णा नाम से, जग में हैं विख्यात।
माता शक्ति प्रदायिनी, भजें सदा दिन-रात।।
(५)
सोहे माला, कमंडल, जग की सिरजनहार।
ज्ञान, ध्यान, वैराग्य का, करें सदा संचार।।
(६)
ब्रह्मचारिणी देवि मां,जग की मूलाधार।
तीनों लोक सृजित किए, रूप शक्ति के धार।।
(७)
कोटि-कोटि वंदन करें, मां आई हैं द्वार।
सकल सृष्टि में कर रहीं, जन-जन का उद्धार।।
ओम प्रकाश खरे © जौनपुर। ०८/१०/२०२१
नवरात्रि पर दोहे : भगवती ब्रह्मचारिणी, नमन करो स्वीकार Navratri Puja
अमृत बेला प्रभात की, खोलिए गृह कपाट।
रुनझुन के संगीत में, आती मेरी मात।।
गले लगाने आ रही, दुर्गा का यह रूप।
तम हरने अब आ रही, छाई उजली धूप।।
भगवती ब्रह्मचारिणी, नमन करो स्वीकार।
सोम्यरूप सुहावनी दर्शन दो इक बार।।
धूप दीप अरु खोपरा, पुष्प पत्र का हार।
रजत थाल फल- फूल की, भेंट करो स्वीकार।।
कलह- क्लेश से दूर रहें, हर वह आंगन द्वार।
व्याधि विपदा सब कटे, चरण पड़े इक बार।।
ललिता कश्यप
गांव सायर जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश
मां ब्रह्मचारिण की आरती | मता ब्रह्मचारिणी का भजन
मां ब्रह्मचारिणी
भोला-भाला रूप सुहाना,
ब्रह्मचारिणी माता का।
ज्ञानी ध्यानी क्या कर सकते,
वर्णन मां की गाथा का।।
हाथ कमंडल, जपमाला है,
मस्तक मुकुट दमकता है।
चेहरा मां का तेजपुंज है,
पूनम चांद चमकता है।।
सारे भारत के देवालय,
गूंज रहे जयकारों से।
रोते आये, हंसते जाते,
पूछो दुख के मारों से।।
तू ही अम्बे, तू जगदम्बे,
सबकी विपदा हरती है।
तू दुर्गा, पद्मा, महेश्वरी,
खाली झोली भरती है।।
गौरी, ललिता, काली भी तू,
जग-जननी कहलाती है,
टोली गातीं, शीश नवातीं,
दर्शन कर सुख पातीं हैं।।
डा.सत्येन्द्र शर्मा, पालमपुर, हिमाचल
Maa Brahmacharini Image
जय माँ ब्रह्मचारिणी आरती | माता ब्रह्मचारिणी के भजन नवरात्रि पर
माँ के स्वरूप उकेरने की एक अदना -सी कोशिश
एवं स्वरचित चौपाई
चौपाई
द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी
नारद से सुन तपश्चारिणी
पुनः शिवशंकर को पति पाने
कठिन तपस्या बैठी ध्याने
स्वाधिष्ठान में साधना हो
मन बुध्दि से आराधना हो
कृपा करो हे देवी माता
अजर अमर हो रिश्ता नाता
मीनू मीना सिन्हा मीनल
राँची, झारखंड
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