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बेटी पर सुंदर शायरी, बेटी दिवस पर कविता Beti Shayari Kavita in Hindi

बेटी दिवस पर शायरी Happy Daughters' Day बेटी का सम्मान करो

बेटी दिवस
बेटी का सम्मान करो
बेटी का सम्मान करो
बेटी पर गुमान करो
बेटी पर अभिमान करो
बेटे सम व्यवहार करो
बेटी नहीँ कम बेटे से
बात पर इस ऐतवार करो
बेटी ही मान दिलाती है
बेटी सम्मान दिलाती है
एक नहीँ दो दो कूल का
वो ही तो मान बढ़ाती है
नहीँ बेटे से कम बेटी
ये बात तो जग में जाहिर है
ट्रक बस रेल से लेकर
हवाई जहाज तक उड़ाती है
हथियार उठा सीमा पर
वो जंग में तहलका मचाती है
राजनीति में बढ़चढ़ कर
देश का मान बढ़ाती है
बेटे से कम नहीँ बेटी
उस पर सदा अभिमान करो
"लक्ष्य" बेटी का सम्मान करो
लोक डाऊन में एक बेटी ने
क्या कमाल कर डाला था
हजारो किमी दूर दादा को
साईकिल से गाँव पहुंचाया था
अभिमान हमें उस बिटिया पर
वक़्त से लड़कर दिखाया था
बेटी का सम्मान करो
स्वरचित निर्दोष लक्ष्य जैन

वो मेरी प्यारी बेटी है : बेटी पर सुंदर शायरी, बेटी दिवस पर कविता Beti Shayari

रिश्ते बेटी
वो मेरी प्यारी बेटी है
वो मेरी प्यारी बेटी है
मैं उसका प्यारा पापा हूँ
वो मेरी लाड़ली बेटी है
मुझे खिलाकर खाती हे वो
मुझे सुला कर सोती है
सूरज के उगने से पहले
मुझको रोज जागती है
वो मेरी प्यारी बेटी है
वो मेरी लाड़ली बेटी है
कभी कभी खुश होती तो
पिताजी कहकर पुकारती है
उसकी प्यारी बोली सुन
हिरदय कमल खिलजाता है
पतझड़ मे बाहर आती है
दिल बाग बाग होजाता है
हम मिले नही हे आजतक
फिर भी वो मेरी बेटी है
हजारो मिल हे दूर मुझसे
पर दिल के पास वो रहती है
कुच्छ रिश्ते नही खून के
पर जान से प्यारे होते है
वो मेरी प्यारी बेटी है
मुँह बोली मेरी बेटी है
मै उसके बच्चों का नाना हूँ
वो लाड़ली मेरी बेटी है
हम मिले नही हे आजतक
पर रोज ही बाते करते है
ये रिश्ता बना मोबाइल से
ये रिश्ता अब तो दिल से है
ये कहानी नही हकीकत है
मेरे जीवन की गाथा है
सच कहता हूँ यारो वो
विधा दाहिनी की बेटी है
मेरी रचना का शब्द शब्द
उसकी ही मेहरबानी है
वो मेरी प्यारी बेटी है
अब तो "लक्ष्य" इतना अपना
बिटिया से मिलना मिलना
वो मेरी प्यारी बेटी है
निर्दोष लक्ष्य जैन

धनबाद झारखंड
मैं बेटी ही हूँ बेटा तुम्हारा : बेटी दिवस पर समर्पित कविता Beti Shayari in Hindi

मैं बेटी ही हूँ बेटा तुम्हारा
सुनों मम्मी पापा सुनों मेंरा कहना,
ना आँखो मैं एक पल भी आँसू है लाना।
सदा मुस्कराना सदा मुस्कराना,
सुनों मम्मी पापा सदा मुस्कराना।

मैं अभिमान तुम्हारा तू स्वाभिमान हमारा।
सदा मान रखूंगी पापा तुम्हारा,
तू पापा नहीँ परमेश्वर हमारा।
सुनों जीवन दाता भाग्य विधाता,
दिया जो ठिकाना तुमनें हमारा
वो ही पापा अब है संसार हमारा।
सदा मान रखूँगी पापा तुम्हारा।
तू पापा है सदा गुमान हमारा।
मैं बेटी ही नहीँ हूँ बेटा तुम्हारा।

सदा मम्मी पापा मुझे याद रखना।
मैं बेटी ही हूँ बेटा तुम्हारा।
सुनों मम्मी पापा ये मेंरा है कहना,
सदा मुस्कराना सदा मुस्कराना।

कभी जब मिलनें का मन हो तुम्हारा,
तो हल्के से पापा जरा मुस्कराना।
पल मे ही पहुँचेगा संदेशा तुम्हारा,
मैं पल पल हूँ पापा हमसाया तुम्हारा।
मेरी रग रग मे है खून तुम्हारा।
मैं बेटी ही नहीँ हूँ बेटा तुम्हारा।

सदा मुस्कराना सदा मुस्कराना।
सुनों मम्मी पापा सदा मुस्कराना।
निर्दोष लक्ष्य जैन
धनबाद

भारत की बेटियाँ : बेटी के सम्मान में शायरी Beti Shayari

दुनियाँ में सदा भारत का मान बढ़ाया
हम कम नहीँ किसी से दुनियाँ को बताया
हर क्षेत्र में अपना सदा लोहा मनवाया
हर मैदान में शान से तिरंगा लहराया
एवरेस्ट पर शान से तिरंगा फहराया
भारत की हर बेटी को सलाम हमारा
जिसने माँ बाप का सर फक्र से उठवाया
हम कम नहीँ बेटों से सबको समझाया
जिन्होंने नित्य नया इतिहास रचाया
भारत की हर बेटी है अभिमान हमारा
सरहद पर भी आज लोहा ले रही बेटियाँ
शान से तिरंगा फहरा रही बेटियाँ
हवाई जहाज भी आज उड़ा रही बेटियाँ
रेल, बस, ट्रक, सब चला रही बेटियाँ
हर क्षेत्र में नाम कमा रही बेटियाँ
हम किसी से कम नहीँ समझा रही बेटियाँ
भारत ही नहीँ विश्व की हर बेटी को सलाम
कम नहीँ किसी बेटे से दिखला रही बेटियाँ
बेटी है "लक्ष्य" गुमान अभिमान हमारा
बेटी का लोहा मानता आज विश्व है सारा
एक दिन ही नहीँ सिर्फ बेटी के नाम दोस्तों
हर दिन ही तो बेटी है महान दोस्तों
स्वरचित ..निर्दोष लक्ष्य जैन
Happy Daughters' Day Wishes बेटी दिवस पर शायरी कविता
Happy Daughters' Day Wishes बेटी दिवस पर शायरी कविता

बिटिया दिवस : नाम करती बेटियां बेटी दिवस पर शायरी Happy Daughters' Day

बिटिया दिवस : नाम करती बेटियां
(सितंबर महीने का चौथा रविवार)
कविता
हर क्षेत्र में डटकर, शानदार काम करती बेटियां,
उम्मीदों से ज्यादा, देश का नाम करती बेटियां।
बिटिया दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सबको,
आसमान में रफाएल से, सलाम करती बेटियां।
सशस्त्र सेनाओं का भी गौरव बढ़ाती हैं शान से,
दुश्मनों को सीमाओं पर, नाकाम करती बेटियां।
हर क्षेत्र में डटकर……
आराम देती सास ससुर को भी, उनके बुढ़ापे में,
समय पर काम, समय पर आराम करती बेटियां।
किसी शिकायत का मौका नहीं देती है किसी को,
बेटों के लिए, एक अनोखा, पैग़ाम करती बेटियां।
घर में बेटियों का आना, देवी लक्ष्मी का आना है,
खतरों के सारे रास्ते अब, हैं जाम करती बेटियां।
हर क्षेत्र में डटकर……
आत्म विश्वास से भरी होती हैं, काम को लेकर,
दुःख के घर में, सुख का इंतजाम करती बेटियां।
दिन लद गए हैं अब, आंसू की बड़ी कमजोरी के,
मुसीबतों का जीना कहीं भी, हराम करती बेटियां।
असंभव को संभव कर दिखाती, अपने दम पर, कुरीतियों की बिदाई, अब सरेआम करती बेटियां।
हर क्षेत्र में डटकर……
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)

दुनिया में अगर बेटी नहीं, तो बेटा कहां से आएगा : अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस विशेष कविता

दुनिया में अगर बेटी नहीं
(अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस विशेष)
दुनिया में अगर बेटी नहीं, तो बेटा कहां से आएगा?
जो बेटियों का महत्व नहीं जानता, कभी पछताएगा।
बेटा कभी मां नहीं बन सकता, यह सभी जानते मानते,
बेटे कुंवारे रह जाएंगे, कोई अगर बेटी को मार भगाएगा।
दुनिया में अगर बेटी नहीं……….
एक घर की बेटी, किसी दूसरे घर की बहू बनकर आती है,
जब बेटी ही नहीं होगी, तो कोई बहू कहां से घर लाएगा?
फिर भगवान की इस सुंदर दुनिया का, हाल क्या होगा?
हर बेटे का बाप, घर के लिए बहू ढूंढता ही चला जाएगा।
दुनिया में अगर बेटी नहीं…………..
बेटियां पहले तो, मां बाप के घर की शोभा शान बढ़ाती है,
बेटी बिन उदास आंगन में, कभी मंडप कैसे बन पाएगा?
शहनाई की धुन सुनने को, लोगों के दोनों कान तरसेंगे,
डोली नहीं उठेगी कभी, सावन बिन बरसे भाग जाएगा।
दुनिया में अगर बेटी नहीं………….
जैसे एक का बेटा दूजे का दामाद, वैसे ही बेटी से बहू है,
बेटी बिन स्वर्ग सा सुंदर घर, नरक में बदल जाएगा।
बेटियां अब तो किसी काबिल बेटे से, कम नहीं लगती कहीं,
न जाने इंसान इस बात को, कब ठीक से समझ पाएगा।
दुनिया में अगर बेटी नहीं…………
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर स्लोगन

बेटी पर शायरी | बेटियाँ बेटी दिवस पर विशेष कविता

बेटियाँ बेटी दिवस पर विशेष कविता
कौन कहता है बेटी होती है भार।
बेटी माँ बाप भाईयों की है प्यार।।
बेटी को भार समझनेवाले होते धूर्त।
या फिर अक्ल से होते पूरे मूर्ख।।
जन्म से ही बेटी लेकर कुछ आती।
लाए में से कुछ ले ससुराल है जाती।।
बेटी होती माँ बाप भाई का अरमान।
ससुराल में भी बढ़ा देती इन सबका मान।।
सबका सम्मान कर स्वयं सम्मान पाती।
सास ससुर की छत्रछाया में जीवन है बिताती।।
दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती होती हैं ये बेटी।
रीत रिवाज संस्कार लिए होती हैं ये जेटी।।
बेटियाँ होती हैं माता पिता की फरमाईश।
सभ्यता संस्कृति आचार की सच्ची पैमाईश।।
माँ बाप भाई से प्यार दुलार पातीं बेटियाँ।
अपने बच्चों पर भी जान लुटाती हैं बेटियाँ।।
हर माँ बहनें होती हैं किसी की बेटी।
आचार विचार सभ्यता का बड़ा सा पेटी।।
बेटी से ही सृष्टि है बेटी से ही संस्कार।
बेटी को जो समझे भार उसको है धिक्कार।।
बेटी ही होती है सभ्यता आचार विचार।
बेटी को न समझे कोई अयोग्य लाचार।।
हर बेटियों को है मेरी यही शुभकामना।
जीवन उनका सुखी हो संकट का न हो सामना।।
अरुण दिव्यांश 9504503560

बेटी के लिए पापा की शायरी

बेटी
बेटी है तो कल है,
बेटी है तो संसार,
बेटी बिन जीन्दगी,
है बहुत हीं बेकार।

बेटी बिन घर नहीं,
नहीं कोई परिवार,
बेटी जीवन का रंग,
बेटी बिन फीका संसार।

किसे कहेंगे माँ बहना,
बेटियाँ जब घर में हो ना,
बेटी से ही घर की रानी,
बेटी सृष्टि का आधार।

बेटी है घर की चिडियाँ,
बेटी से है घर गुलजार,
बेटी से घर की खुशियाँ,
बेटी से जहाँ में प्यार।
अरविन्द अकेला
पूर्वी रामकृष्ण नगर, पटना-27

प्यारी बेटी के जन्मदिन पर शायरी Happy Daughters' Day
बेटियां

विधा चौपाई
है बेटियां बहुत जग लुभाविनी।
बहु - बेटी बन घर सुहाविनी।।
सभी तरह से पूर्ण कामा।
जगत में उच्च आसन थामा।।

है अति विकट काम कर डाले।
आ देश की बाग संभाले।।
कभी पवन पार शशि छु आवे।
कभी सप्त जलधि लांघ आवे।।

बन मां ममता करे उजागर।
बन प्रीतम की छलके गागर।।
सुख-दुख चाहे भारी आवे।
विष सुधा जान सब पी जावे।।

बेटी महा शक्ति कहलावे।
इनका कोई पार न पावे।।
प्रेम नीर बहाती बेटियां।
हृदय में बसती है बेटियां।।
ललिता कश्यप
गांव सायर जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश

बेटी दिवस पर शायरी | राष्ट्रीय बेटी दिवस पर कविता : बेटी है तो सब कुछ है

शीर्षक-" बेटी है तो सब कुछ है "
बेटी ममता की पहचान होती है।
बेटी जीवनदायिनी समीर होती हैं।

बेटी ईश्वर की वरदान होती है।
बेटी माँ-बाप की शान होती है।

परिवार एक रंगीन चमन होता है।
बेटी उस चमन की फूल होती है।

बेटी संस्कारों की लड़ी होती है।
दो परिवारों की वो कड़ी होती है।

बेटी त्याग की दरिया होती है।
बेटी खुशी की लड़ियाँ होती है।

बेटी माँ के दिल का टुकड़ा होती है।
बेटी दिलोजान की चाहत होती है।

बेटी दरवाजे पर शहनाई बजवती है।
बेटी सबसे बड़ा दानी भी बनवाती है।

बेटी भोर की सुनहली किरण होती है।
बेटी रात की शीतल चाँदनी होती है।

जिस घर में प्यारी बेटियाँ होती है।
उस घर की मीठी रोटियाँ होती है।

क्या लिखूँ कैसे लिखूँ कितना लिखूँ,
"दीनेश" शब्द कम पड़े इतना लिखूँ।
दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता

बेटी पर कुछ सुंदर लाइनों की कविता : ईश्वर का प्रसाद है बेटियां

बेटी दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं
शीर्षक-ईश्वर का प्रसाद है बेटियां
जीवन में बहार हैं बेटियां
दो घर का चिराग है बेटियां,
बदकिस्मत होते हैं वह लोग,
जो नहीं चाहते हैं बेटियां।

अभी भी इस संसार में,
दुविधा है बहुत बड़ी,
यहां दहेज के खातिर,
जला दी जाती है बेटियां।

आज भी जहां बेटो को,
मानते हैं घर का चिराग,
वहां पैदा होने पर दूध में,
डूबा दी जाती है बेटियां।

जहां बेटियों को पालते हैं,
बेटों की ही तरह,
वहां नाम रोशन कर जाती है,
ये प्यारी-प्यारी बेटियां।

जहां समझते हैं बेटियो को,
अपने बेटों के जैसा,
वहां कल्पना और मैरी कॉम,
बन दिखाती है बेटियां।

दिल में जुनून रखती हैं,
ये भी कुछ कर दिखाने का,
अंधेरे को चीरती किरण,
की तरह होती है ये बेटियां।

न समझो इसे किसी,
खैरात की तरह तो तुम,
ईश्वर का अमूल्य प्रसाद,
होती है यह बेटियां।

स्वरचित व मौलिक रचना
आभा चौहान "आभ"
अहमदाबाद गुजरात

बेटी के लिए स्टेटस | Beti Ke Liye Status
गीत है बेटियाँ

खिलती है चाहती हैं महकती है बेटियां दिल के किसी कोने में सकते हैं बेटियाँ।
प्यार से पाला उन्हें आंचल की छांव में
मां बाप बहन भाई की प्यारी है बेटियां।।
पढ़ लिख कर अपनी शान से महका गई अंगना
बाबुल की आन वान
निभातीं हैं बेटियाँ।।

कहने को तो अपमान भी सह जाती बेटियां
अन्याय से लड़ते हैं गरजतीं हैं बेटियाँ।।

ये फूल बनकर घर मैं
महकती हैं बेटियाँ।
गीता कभी रामायण
ऋचाएं हैं बेटियाँ।।

हर बार ये प्यार मेंछली
जाती बेटियाँ
घर और समाज देश की
रौनक हैं बेटियाँ।।

बदला है युग समाज तो
बदलीं हैं बेटियाँ
छूती हैं शिखर
आज हिमालय का बेटियाँ।।
आशा श्रीवास्तव भोपाल

बेटी के लिए स्टेटस बेटी दिवस की शुभकामनाएं

"बेटी"
बेटियाँ जान हैं, बेटियाँ मान हैं-2
बेटियों से हमारी ये पहचान है।
घर में बेटी जो है,फिर तो रौशन है घर,
बेटियों से है होता, सुख से बसर।
बेटियाँ ख्वाब हैं, दिल के अरमान हैं,
बेटियों से हमारी ये पहचान है।
हर कदम साथ दे,सबसे आगे रहे,
भाग्य उनसे हमारे ये जागे रहे ।
सच कहूं बेटियाँ, सबकी मुस्कान हैं,
बेटियों से हमारी ये पहचान है।
जग का है वो सृजक,है खुशी से चहक,
रूप कितने धरे,फूलों की हैं महक ।
बेटियाँ जो न हो,फिर तो क्या शान है,
बेटियों से हमारी ये पहचान है।
प्रीतम कुमार झा
महुआ, वैशाली, बिहार

उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक | बेटी दिवस पर तंज शायरी

उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक
जो अपनी बेटी को बेटी समझते हैं,
दूसरे की बेटी को हवस बनाते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

जो अपनी बेटी को इज़्ज़त का दायरा बताते हैं,
और बेटी की उम्र की लड़की पे डोरे डालते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

जो अपनी बेटी को डोली में बिठाते हैं,
दूसरे की बेटी को अर्थी में सजाते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

जो अपनी बेटी को मर्यादा का पाठ पढ़ाकर,
दूसरे की बेटी के बलात्कार को सही ठहराते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

जो अपनी बेटी पे ममता उड़ेलकर,
दूसरे की बेटी को आग में जलाते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

जो बेटों और बेटियों का फ़र्क़ बताकर,
बेटियों को पायल बोल ज़ंजीर पहनाते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

जो अपनी बेटी का ख़्वाब सजाकर,
दूसरे की बेटी का तमाशा बनाते हैं।
उन्हें भी बेटी दिवस मुबारक।

समाज में रहने वाले हर किसी को बेटी दिवस मुबारक।
हाँ, बेटी दिवस मुबारक, बेटी दिवस मुबारक।
स्वरचित
नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़
मुंबई
Nilofar Farooqui Tauseef
Fb, IG-writernilofar
समाज के सभी पापीयों, राक्षसों और दैत्यों तथा अपने आप को बलवान, धनवान, स्वयं को सर्वशक्तिमान समझने वाले बलात्कारियों को हिन्दी उर्दू साहित्य संसार की ओर से बेटी दिवस की विशेष शुभकामनाएं! हे पापियों आप सबको भी बेटी दिवस मुबारक! ईश्वर आपके घरों में भी बेटियां पैदा करें!

यह रिश्ता क्या कहलाता है? बेटी आन बान शान बेटी दिवस

शीर्षक ---बेटी आन -बान -शान।
सबसे पहले बेटी दिबस की सभी बेटियों को
दिल से नमन्। हर स्त्री वह चाहे। मां, बहन
पत्नी, सासू मां जो भी रिश्ते बनते हैं।
उनमें सबसे पहले बेटी के रूप में दुनिया मे आती है।
बाद में दूसरे रिश्ते बनते है।
बेटी के आते ही कहीं खुशियां मनाई जाती है।
तो कहीं मातम छा जाता है जिस घर में बेटी पसन्द नहीं, की जाती।
जरा ठहर कर सोचिए !
अगर बेटी न हो, तो बहू कहां से लाओगे ??
अगर बहू न मिली! तो दादा दादी का सुख कहां पाओगे ?
कंधों पर किसे घुमाओगे घोड़ा किसके लिये बनोगे?
दो कुल बसाती है बेटियां, दोनों कुल की लाज बचाती हैं
बेटियां। मां पापा की आंखों का तारा होती है बेटियां
बचपन में भाई की भी लाडली होती है बहनें
भाई मस्ती करते! जब डांट या मार खाने की बारी आती
तो यही बहन भाई की गल्ती अपने ऊपर लेकर
भाई को डांट से बचाती है बहन
तो फिर क्यों न होगी सबकी लाडली बेटी बहन
बेटियों से भी एक विनती है। ससुराल मे भी प्यार से
सबको अपना बनाकर रक्खे नंदो को सहेली
देवर को भाई माने उनसे भी विनम्र विनती है
जैसे हम बहनों बेटियों को ससुराल में भी इज्जत मिले
चाहते हैं। हमें भी पराये घरो से आई हमारे घर मे बहू
बन कर आती है। बेटियां हमभी उनको उतना बल्कि ज्यादा सम्मान दे जितना हम चाहते है
स्वरचित--कविता मोटवानी
बिलासपुर छत्तीसगढ़

बेटी शायरी | बेटी को जन्मदिन की शुभकामनाएं

बेटी दिवस /(26/09/2021)
बिषय: बेटी
विधा: कविता
शिर्षक: बेटियाँ हमारी आन और शान
बेटी कब बड़ी हो जाती है पता हीं नहीं चलता!
और, शादी लायक हो जाती हैं देखते-देखते
माँ-बाबा की जान होती है यह बेटीयाँ।
लाड़-प्यार से बड़ा करदेते वे बिटियाँ।
क्यों (?) देते हैं अनजानों को ये बिटियाँ।
क्या (?) ये प्रथा बदल नहीं सकती आज मुझे बताओ।
ये समाज आये दिन बेटीयों को मार डाला जाता है।
कहाँ का यह न्याय है, कैसी दूहन की यह परंपरा?
आराम से अपने बेटे की दुसरी शादी रचा लेता है।
अपनों को छोड़ आती है बेटियाँ।
जो दर्द माँ बेटे के लिए सहती है।
वही प्रसव पीड़ा बेटी में सहती है।
फिर बेटा-बेटी दो अलग हुए कैसे।
एक है माँ के लिए- पोसे एक जैसे।
कानून बना है अबतो- जरा समझ जा।
बेटी का हक है कुछ- सुधर बदल जा।।
मेरी दुलारी चार बेटियों: रचना, मिथ्या (व्यंजना), कल्पना एवम् अंतिमा को समर्पित
पुष्पा निर्मल, बेतिया, बिहार
Pushpa Nirmal

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर स्लोगन

बेटी एक वरदान कविता | मुक्तक - वरदान बेटीयां

ईश्वर का वरदान बेटियां गौरव मान सम्मान कहलाती हैं।
मात पिता जख्मों लगाती मरहम नाम खानदान बढ़ाती हैं।
धन यश कृति समृद्धि उन्नति प्रगति वैभव विकास बेटियां।
देवी दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती ये राष्ट्र अभिमान कहलाती हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर स्लोगन

मा का कोख न उजाडो बेटीयां न मारो।
बिना बेटियां कुछ नहीं संसार न जारो।
बेटों से बढकर बड़ा काम खूब करती है।
घर की रौनक बेटियां इनको जरा दूलारो।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर स्लोगन

चूल्हा चौका ही नहीं प्लेन ट्रेन गन ये चलाती है।
लेती लोहा दुश्मनों से मार जमीन ये सुंघाती है ।
रूप यौवन श्रृंगार प्यार बहार संसार इन्हीं से है।
बेटी पढ़ाओ इनको बढ़ाओ ये रोशनी जलाती है।
श्याम कुंवर भारती

बेटी बचाओ अभियान पर स्लोगन नही होगी तो दूल्हन कहाँ से लाओगे

बेटी नही होगी तो दूल्हन कहाँ से लाओगे,
और विरह गीत किस तरह से गुनगुनाओगे,
दुनिया में हर तरफ जश्ने चिराग दफन हो रहे है,
हरियाली अमावस्या क्या खाक मनाओगे।।
विनोद कुमार जैन वाग्वर
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