मनक़बत हज़रत अब्बास अलमदार की शान में
हज़रत-ए-अब्बास से है
सर पे साया करम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
ये सहूलत अलम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
इरतिआश आता है पानी में ब-ज़ाहिर लेकिन
थरथराहट क़दम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
फ़िक्र रहती है जो ज़रखेज़ ज़मीनों के लिए
ये नमी चश्म-ए-नम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
मेरी आँखों में हया, साँस में तस्बीह-ए-वफ़ा
दम-ब-दम है तो दम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
मौत कहती है मेरे कान में अक्सर आकर
ज़िंदगी है तो ग़म-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
लोग कहते हैं मुझे ख़ाक-ए-रह-ए-कर्ब-ओ-बला
ऐसी निस्बत हरम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
ये भी क्या कम है कि उर्दू का ये प्यासा साक़िब
शाइरान-ए-अजम-ए-हज़रत-ए-अब्बास से है
— अब्बास साक़िब
और पढ़ें 👇

0 टिप्पणियाँ