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सैयदों का ग़म मनाएँ दो महीने आठ दिन

सैयदों का ग़म मनाएँ दो महीने आठ दिन


दो महीने आठ दिन

सैयदों का ग़म मनाएँ दो महीने आठ दिन
और फ़क़त आँसू बहाएँ दो महीने आठ दिन

जिन की आँखें रो रही हैं तिश्ना-लब बे-शीर पर
उन को हम पानी पिलाएँ दो महीने आठ दिन

हम ने देखी है क़यामत कर्बला की रेत पर
हम न अब ख़ुशियाँ मनाएँ दो महीने आठ दिन

भूल जाएँ फ़ातिमा के लाल पर रोते हुए
अपनी औलादों को माएँ दो महीने आठ दिन

बेघरों के ग़म में अपने घर की राहत छोड़ कर
बस अज़ाख़ानों में जाएँ दो महीने आठ दिन

बेटियों बहनों के सर पर साल भर क़ायम रहें
जो रहें सर पर रिदाएँ दो महीने आठ दिन

मजलिस-ए-शहؑ में करें तौफ़ीक़-ए-तौबा की दुआ
हम भी ख़ुद को हुर्र बनाएँ दो महीने आठ दिन

ख़ुत्बा-ए-सज्जादؑ व ज़ैनबؑ ज़ुल्म के इस अह्द में
हर समाअत को सुनाएँ दो महीने आठ दिन

किस का बेटा है हुसैनؑ और किस का बेटा है यज़ीद
सारी दुनिया को बताएँ दो महीने आठ दिन

दम-ब-दम गिरिया करें, साक़िबؔ! शह-ए-मज़लूमؑ पर
फ़ातिमाؑ से लें दुआएँ दो महीने आठ दिन

अब्बास साक़िबؔ

Do Mahine Aath Din Muharram Ka Noha Marsiya Karbala Ka Matam

do mahine aath din mohabbat shayari

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