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ईद पर शायरी हिंदी में : प्यासे लबों की प्यास बुझाएँ तो ईद है

Eid Par Shayari Hindi Pyase Labon Ki Pyas Bujhae To Eid Hai


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ईद पर शायरी हिंदी में : प्यासे लबों की प्यास बुझाएँ तो ईद है

ग़ज़ल
नफ़रत की तीरगी को मिटाएँ तो ईद है
उल्फ़त के हम चराग़ जलाएँ तो ईद है।

जिनके घरों में आज भी चूल्हा नहीं जला
खाना अगर हम उनको खिलाएँ तो ईद है।

पानी नहीं नसीब है कितनों को देखिए
प्यासे लबों की प्यास बुझाएँ तो ईद है।

जिनके लबों की छीन ली हालात ने हँसी
मुस्कान उन लबों पे सजाएँ तो ईद है।


उजड़ी हुई है झोपड़ी देखो ग़रीब की
उस झोपड़ी को ठीक कराएँ तो ईद है।

गर्दिश वतन की आज मिटाने के वास्ते
हम अम्न के दरख़्त लगाएँ तो ईद है।

माना कि ख़तरा हाथ मिलाने में है मगर
दिल से ही दिल को हम जो मिलाएँ तो ईद है।

मज़लूम रो रहे हैं "अतीया" जो हर तरफ़
आवाज़ उनके हक़ में उठाएँ तो ईद है।
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अतिया नूर
24/5/2020

ये ग़ज़ल पहले लॉक डाउन के वक़्त कही थी, जब मज़दूर मज़लूम अपने घरों को लौट रहे थे

ईद पर नज़्म शायरी : हम कैसे ईद मनाएंगे

नज़्म
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हम कैसे ईद मनाएंगे
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जब मेहनत करने वालों को हम हक़ ही दिला न पाएंगे....

हम कैसे ईद मनाएंगे?

फुटपाथ पे सोने वाले जब तक अपने घर न जाएंगे..


ये भूक से रोते लोग अगर
भरपेट न खाना खाएंगे...

बच्चों के नाज़ुक कन्धों पर, कुछ लोग जो ज़ुल्म यूँ ढाएंगे...

मज़हब के नाम पे लोग अगर, दंगे यूँ ही भड़काएँगे....

कुछ लोग मुनाफ़े की ख़ातिर, इंसाँ का ख़ून बहाएंगे...

बहनों/बेटी की इज़्ज़त की
बोली जब लोग लगाएंगे....

नौ-नस्ल को उनकी मंज़िल के नज़दीक नहीं पहुंचाएंगे...

बे मौत यूँ मरते लोगों को हम लोग बचा न पाएंगे....

मरने वालों को अपने ही कांधा भी नहीं दे पाएंगे...

अनगिनत सवाल जो मन में हैं उनको न अगर सुलझाएँगे....

हम कैसे ईद मनाएंगे?
हम कैसे ईद मनाएंगे?
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अतिया नूर

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