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श्याम भजन Shyam Bhajan श्याम आरती Shyam Aarti वंशी बजाओ श्याम

वंशी बजाओ श्याम : श्याम भजन Khaatu Shyam Bhajan श्याम बाबा के भजन

भक्ति गीत : वंशी बजाओ श्याम
वंशी बजाओ श्याम, वंशी बजाओ श्याम,
मन को मिलती चैन, आत्मा को आराम।
वंशी बजाओ श्याम…………
तेरी वंशी हम सबका मन मोह लेती है,
नित नित जीने का नया संदेश देती है।
सारा जग करता, तेरी वंशी को प्रणाम,
वंशी बजाना कैसे भूल गए घनश्याम?
वंशी बजाओ श्याम…………
प्रभु कोई कहता है तुमको नाग नथैया,
कृष्ण कन्हैया, कोई कहता रास रचैया।
तेरी वंशी ने बनाया है राधा को गुलाम,
प्रेम दीवानी ये राधा रानी हुई बदनाम।
वंशी बजाओ श्याम………..
यमुना किनारे तोहे, खोज रही है राधा,
कैसे भूल गए आज, मिलने का वादा?
कान्हा आज तो हो गई सुबह से शाम,
आज घर का, हो न सका कोई काम।
वंशी बजाओ श्याम……….
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
नासिक (महाराष्ट्र)/
जयनगर (मधुबनी) बिहार

श्याम भजन Shyam Bhajan श्याम आरती Shyam Aarti वंशी बजाओ श्याम

श्याम भजन लिरिक्स Shyam Bhajan Lyrics भक्ति गीत : अब वंशी मत बजाना श्याम

भक्ति गीत : अब वंशी मत बजाना श्याम
अब अपनी वंशी मत बजाना हे श्याम,
हम सखियों का जीना हो गया हराम।
सुध बुध सब तुमने छीन ली है हमारी,
अब कहां याद रहता हमें, अपना नाम?
अब अपनी वंशी मत…………
बड़ी मधुर बजती कृष्णा, तेरी मुरलिया,
सबको फंसा लेते हो, तू है बड़ा छलिया।
भूख प्यास सब मिट जाती, नित हमारी,
तेरे लिए तो हुए हम, पहले से बदनाम।
अब अपनी वंशी मत…………..
तेरी वंशी ने हमें बना दिया है बावरिया,
किस किसका तू अकेले बनेगा सांवरिया?
क्यों इतना रस तुम बरसाते हो रसिया?
हमारा कतरा कतरा हो गया तेरा गुलाम।
अब अपनी वंशी मत…………
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)


श्याम भजन भक्ति गीत : क्यों भूल गए घनश्याम

(ॐ श्री वासुदेवाय नमः)
हमें क्यों भूल गए घनश्याम?
हां हमें क्यों भूल गए भगवान?
तेरे बिन लगता है जीवन सूना,
बिगड़ गए जीवन के सब काम।
हमें क्यों भूल गए……..
क्यों चुप है अब मुरलिया तेरी?
आने में तुम क्यों करते हो देरी?
जब पधारते तुम मन मंदिर में,
मन को चैन, दिल को आराम।
हमें क्यों भूल गए……..
कब तक इंतजार करेगी मीरा?
आत्मा बन गई उसकी अधीरा।
राह तेरी ताक रही यह दुनिया,
सुबह से अब तो हो गई शाम।
हमें क्यों भूल गए…….
सूना सूना लगता यह मधुवन,
महकना छोड़ रो रहा है चंदन।
गलियां उदास, कलियां व्यथित,
सबके होठों पर बस तेरा नाम।
हमें क्यों भूल गए……..
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)


श्याम भजन होली भक्ति गीत : श्याम खेले होली मधुवन में

श्याम खेले होली मधुवन में (गीत)
(होली भक्ति गीत)
“श्री वासुदेवाय नमः”
मधुवन में, श्याम खेले होली मधुवन में,
वृंदावन में, कृष्णा खेले होली वृंदावन में।
मधुवन में हो हो मधुवन में… ……
गोपीयन से बोले, प्यासे नटखट कन्हैया,
नाचो मेरे संग मिलकर सब तता थैया।
बोली राधा रानी, मैं तो मर गई रे मैया,
बोली गोपीयन सब, हाय दैया रे दईया,
आई रे रंगों की बरखा बहार, जीवन में,
वृंदावन में, कृष्णा खेले होली वृंदावन में।
मधुवन में, श्याम खेले…………….
मुस्काए वंशी बजाए, श्याम वंशी बजैया,
पीछे पीछे ग्वाल बाल, आगे आगे गैया।
महके चमन वन, छुए तन पवन पूर्वैया,
छोड़े न कान्हा, राधारानी छुड़ाए कलैया।
फागुन में, नंदलाल खेले होली फागुन में,
वृंदावन में, कृष्णा खेले होली वृंदावन में।
मधुवन में, श्याम खेले…………..
कहां खोए कन्हैया, खोजे यशोदा मैया,
रंगा मधुवन बना है, जैसे भूल भुलैया।
मधुवन रास रचाए, देखत रास रचैया,
सताए मुरली बजाए रे, मुरली बजैया।
तन मन में, अगन लगाए तन मन में,
वृंदावन में, कृष्णा खेले होली वृंदावन में।
मधुवन में, श्याम खेले…………
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)


श्याम भजन होली गीत : चोरी चोरी श्याम ने

“आप सभी मित्रों एवं साथियों को रंगोत्सव होली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं एवं अशेष बधाईयां।"
चोरी चोरी श्याम ने रंग दिया डाल,
ऊपर से नीचे तक कर दिया लाल।
चोरी पकड़ी तो उसने की बलजोरी,
मार मार पिचकारी किया बुरा हाल।
चोरी चोरी श्याम ने………
श्याम सलोना है बड़ा रंग रसिया,
कभी छेड़े, कभी बजाए वो वंशिया।
चुनरी, चोली की उतर गई मस्ती,
गुलाल से खिल उठे मेरे गोरे गाल।
चोरी चोरी श्याम ने………
बड़ी मुश्किल है उसको समझाना,
ढूंढ लेता श्याम कोई नया बहाना।
पकड़ लेता है जब कोमल कलाई,
बेकार कर देता, कंगन की चाल।
चोरी चोरी श्याम ने……..
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)

भक्ति गीत : तुम कहां खो गए घनश्याम 

“ॐ श्री वासुदेवाय नमः”

हाय तुम आज कहां खो गए घनश्याम,
तेरे इंतजार में, सुबह से हो गई शाम।
दो नयनों से निंदिया भाग गई मोहन,
तेरे बिन मुरारी, जीना हो गया हराम।
हाय तुम आज कहां………

राह निहारते हुए तेरी, भूल गई खाना,
जो भी देखता है, मार रहा वही ताना।
भूख, प्यास दोनों गायब है जीवन से,
सब भूलकर मैं जप रही हूं तेरा नाम।
हाय तुम आज कहां……….

न मैं मीरा दीवानी, न हूं राधा रानी,
पर तुमसे जुड़ी है जन्मों की कहानी।
तुम सब जानते हो, अंजान न बनना,
सोते जागते करती हूं तुमको प्रणाम।
हाय तुम आज कहां………..

तेरी वंशी बजती है, मन पाता है चैन,
हंसते गाते कट जाती तब, सारी रैन।
बड़ी कोशिश की, पर मिल न सकी रे,
कई बार गई हूं मैं पावन मथुरा धाम।
हाय तुम आज कहां………..
प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)

श्याम भजन लिरिक्स Shyam Bhajan Lyrics
श्याम भजन लिरिक्स - Shyam Bhajan Lyrics

Shyam Bhajan श्याम बिरह गीत : श्याम चितचोर कब समझोगे मन की पीर

श्याम बिरह गीत - मै दिन हिन।
मै दिन हिन तेरे अधीन तेरे बिन मन अधीर।
श्याम चितचोर कब समझोगे मन की पीर।

हर पल छल करते आओगे कह नहीं आते।
नैन बरसे मन तड़पे जब तुम याद है आते।
चैन पड़े न सावन भाए हिय प्रिय है गंभीर।

समझो प्यारी राधा मिलन मे दुरी है बाधा।
ममतामई हे करुणामई तुम प्रिय मेरी राधा।
मिलन को तड़पुं मै भी पावों है जग जंजीर।

बहाना बनाना खूब तुम जानो आने से बचते।
रहूं कैसे तेरे बिन कान्हा हाल नहीं समझते।
चुराया है तुमने दिल मेरा अब बदलो तकदीर।

मोह लिया मन को मनमोहन अब आ जाओ।
रंग अपने सांवरे श्याम रंग रग रग रम जाओ।
भरमाओ न बांके बिहारी बहते नैनो है निर।
श्याम कुंवर भारती
बोकारो झारखण्ड
श्याम सांवरिया : श्याम भजन Shyam Bhajan

श्याम सांवरिया : श्याम भजन Shyam Bhajan

मुक्तक - श्याम सांवरिया
बहे नैन नीर याद जब आए तेरी प्रीतम श्याम सांवरिया।
विरह में तेरी हुई मै बेचैन व्याकुल राधिका बावरिया।
सुना के मोहिनी मुरिली मनमोहन मन मोह लिया तूने।
चैन न आवे तेरे बिन कान्हा आन मिलो राधा गुजरिया।
श्याम कूंवर भारती

मुक्तक - श्याम पिया

कहा गए तुम श्याम पिया चित ले गए चितचोर।
तेरे बिना उदासी राधा ढूंढे बन बावरी सब ओर ।
नींद न आवे तुझ बिन मोहन आवे याद मोहिनी मूरत।
बिरह की मारी मै बेचारी राह जोहत हो गई भोर।
श्याम कुंवर भारती


खाटू श्याम भजन लिरिक्स

बांसुरी बन कर, मेरे तुम, अधर पर सजो, 
मैं श्याम बनकर, तुम्हे, गुनगुना लूं जरा,
लौट आओ के, रूठो तुम, फिर से सनम, 
मैं, कस के बांहों में, तुमको, मना लूं जरा, 
है दौर आया नया, कौन अब, गाये किसे, 
है सपन ही सही, आंखों में, सजा लूं जरा,।।
आनंद पाण्डेय "केवल"
भरोसा,

गमों का सैलाब लिए फिरता हूँ, 
दर्द मैं बेहिसाब लिए फिरता हूँ,।।
श्याम भरोसे पर हाथ में केवल,  
गीता की किताब लिए फिरता हूँ।।
आनंद पाण्डेय "केवल"
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