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दुसरी शादी की हकीकत कविता शायरी Poetry On Second Marriage In Hindi

दुसरी शादी की हकीकत कविता शायरी | बार बार शादी ज़रुरत या हवस

जदीद,मुन्फ़रिद,इन्क़लाबी, उम्दा-व-तुर्फा, इस्लाही मन्ज़ूम तख़्लीक़
वैसे तो दुनिया भर के साहित्यकारों, विचारकों और बुद्धिजीवियों ने दूसरी शादी या बेमेल शादी के संबंध में बहुत कुछ लिखा है। जैसे— प्रेमचंद, कृष्ण चंद्र, राजेंद्र सिंह बेदी, सआदत हुसैन मंटो वगैरह लेकिन इन सबसे अलग हटकर आज से लगभग 20 - 25 साल पहले भोजपुरी का एक गाना इस संबंध में बहुत लोकप्रिय था आइए पहले उसके कुछ अंश पढ़ते हैं फिर असल कविता की तरफ चलेंगे।
बाबु जी शादी न कईला बरबादी कईला।
हमके बुढ़वा भतार काहे खोज दिहला।
आधी आधी रतिया बुढ़वा पानी मांगे ला।
भकुआ मरदवा हमसे पानी मांगे ला।
पानी में भीगा के ऊ जवानी मांगे ला।
घरी घरी प्रेम कहानी मांगे ला।
बाबु जी शादी न कईला बरबादी कईला।
हमके बुढ़वा भतार काहे खोज दिहला।
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" ख़ुदा, तमाम रसूल-ए-खुदा से डरो "!
" जहान-ए-फानी में तुम नेक काम करो "!!
" बेवाओ से निकाह करो!," "आप/ रसूल-ए-पाक/ हज़रत-ए-मुहम्मद मुस्तफ़ा ने कहा!
ऐसा यहाँ, हमारे भी " माँ-बाप " ने कहा!!
" बेवाओ से निकाह करो ", मेरे दोस्तो / मोमिनो!
" अब तो रसूल-ए-पाक की तुम पैरवी करो "!!
" पहली शरीक-ए-ज़ीस्त " मरी है अभी-अभी!!
लेकिन " नयी " तलाश रहा है ये " मौलवी "!?
" साला मेरा," निकाह " की ख़ातिर " उतावला "!?
"फिर दूजी/ दूसरी की तलाश में फिरता है बावला!?
दाग़-ए-मुफ़ारिक़त के हैं ये ज़ख़्म भी हरे!!
ज़ौजा-ए-साबिक़ा की है " उल्फ़त " लहू-लहू!!
साला मेरा, " निकाह " की ख़ातिर है " बे-क़रार "!?
साली का भी है " इश्क-व-मुहब्बत " लहू-लहू!!
साली भी है निकाह ही कर के लहू-लुहान!?
संसार ही में ऐसा है काहे? हे/ऐ भाग्यवान!!
" ज़न " उस की, हाल ही में मरी है!, मगर है क्यों!?
साला मेरा, " निकाह " की ख़ातिर " उतावला "!!
चम्चागिरी से क्या? मिले है, मेरे साले जी!
शायद कोई/ नया ख़ुदा मिले है, मेरे साले जी!!
" भारत " का भट्ठा बैठा दिया रहनुमाओं ने!?
नेतागिरी से क्या? मिले है, मेरे साले जी!!
अय्याशियों, जहालतों के हैं अंडे दिमाग में!!
" इस्लाम " के खिलाफ़ हैं चूज़े नये नये!!
अय्याश लोग खा रहे हैं " चूज़ा-चूज़ा-माल "!?
भूना हुआ ये बीफ-मटन, भूँजा-भूँजा-माल!?
" इस्लामी-बासी-रोटियाँ खा!, बरकतें होंगी!!
" सूफ़ी " कहे है : छोड़ ही दे ताज़ा-ताज़ा-माल!!
जाहिल, रज़ील, रिन्द,मुसल्मानों ही से तो!
"बद-नाम" हो रहा है ये " दीन-ए-मुहम्मदी "!?
ओबाश मर्द, और ये हर्राफ़ा औरतें!?
बाज़ार में दिखाई दें सर्राफ़ा औरतें!?
उन के घरों में झाँक के देखा करें, हुज़ूर!!
काहिल/ भड़वे हैं मर्द!?, मेहनती हैं सारी औरतें!!
" उस्मान " की," ग़नी " की सख़ावत करो हो याद!? 
" कर्रार " की, " अली " की शुजाअत करो हो याद!?
अपना लो तुम, रसूल की सुन्नत को,मोमिनो/ दोस्तो!!
ज़िन्दा करो नबी की रवायत को मोमिनो/ दोस्तो!!
" पहली " मरी तो " दूजी/ दूसरी " को फ़ौरन ले आए तुम!?
हाँ!, दूसरी हसीना से शादी के बाद फिर!
" दोशीज़ा से,कंवारी बेटी से नज़र मिली!!
शर्मिन्दा तुम हुए!?, कभी शर्मिंन्दा हम हुए!!
" अय्याश " है," रज़ील " है, ये " बन्दा-ए-ख़ुदा "!?
" हम-बिस्तरी " किए बिना,रह ही नहीँ सका!?
तन्हाईयों में सोचो!, शरीफ़ो!, क्या हो तुम!?!
अय्याशियों को छोड़ो!, " बेटी बियाहो तुम "!!!
अजहल, रज़ील, रिन्द, मुसलामानों ही से तो!,
बद-नाम हो रहा है ये " इस्लाम ":दीन-ए-हक़!!
" तालीम-याफ़्ता" बनो!," जाहिल" रहो न तुम!!
" मज़दूरी" ही सही!,करो!,काहिल न रहो तुम!!
अय्याश मर्द और तवायफ/ अजीब वायफ/ वाइफ हैं औरतें बहुत!!
लेकिन, कहाँ!?
उस्ताद रामचन्द्र/ या अल्लामा / जावेद क़ैस फ़ैज़ " से ख़ायफ़ हैं औरतें बहुत!?
अजहल, अजीब, और ग़रीब-व-गदा हैं सब!!!
या रब!,सभी को " बख़्श दे!,सब का ख़ुदा है तू!
GOD BLESS YOU!
नोट :- इस तवील और मुन्फरिद मन्ज़ूम तख़्लीक़ के दीगर शेर-व-सुखन आइंदा फिर कभी पेश किए जायेंगे, इन्शा-अल्लाह!
Ramdas Ram Jawaid Ashraf Faiz
डाक्टर इन्सान प्रेमनगरी, द्वारा, डॉक्टर रामचन्द्र दास प्रेमी राज कुमार जानी दिलीपकुमार कपूर, डॉक्टर जावेद अशरफ़ कैस फैज अकबराबादी मंजिल, डॉक्टर खदीजा नरसिंग होम, रांची हिल साईड,इमामबाड़ा रोड, राँची-834001,झारखण्ड, इन्डिया!
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