मुनाजात : मेरे अल्लाह तबाही से बचा ले मुझको
मुनाजात
जीने देते नहीं दिल के तो ये छाले मुझको
मेरे अल्लाह तबाही से बचा ले मुझको
तू ही ख़ालिक़ है मेरा और तू ही मालिक या रब
हर मुसीबत से यहाँ तू ही निकाले मुझको
मुझको हालात ने घेरा है, ज़माना दुश्मन
अपनी रहमत की तू चादर में छुपा ले मुझको
हूँ मैं आसी यहाँ, कुछ भी तो नहीं आता है
फिर भी देता है तू हर वक़्त निवाले मुझको
रात इस्लाम ये ज़ुल्मत की बहुत गहरी है
वो मेरा रब ही दिखाएगा उजाले मुझको
इस्लाम शिकारपुरी
शिकारपुर
इंडिया

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