हम्द : तेरी नवाज़िशों ने तो हैरान कर दिया
हम्द
तेरी नवाज़िशों ने तो हैरान कर दिया
एक फूल से ही तूने गुलिस्तान कर दिया
सुल्तान को वो चाहे तो कर दे फ़क़ीर भी
उसने जिसे भी चाहा तो सुल्तान कर दिया
ये मंज़िलों की राहतें उसका करम है सब
उसने तो रास्तों को भी आसान कर दिया
सारे जहाँ में बिखरी है इबरत की रौशनी
आलम को उसने सारे दबिस्तान कर दिया
इस्लाम, वो करीम है, वो ही रहीम है
सहरा की रेत को भी गुलिस्तान कर दिया
इस्लाम शिकारपुरी
शिकारपुर
इंडिया

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