फ़लक से अर्ज़ तलक ज़िक्र अब हुसैनؑ का है : मर्सिया
मर्सिया
फ़लक से अर्ज़ तलक ज़िक्र अब हुसैन का है
कि अब अदू का निशाना हसब-ए-हुसैन का है
समझ न पाए जो मौत-ओ-हयात, कहते हैं
कि घर लुटाने का फ़तवा अजब हुसैनؑ का है
ये फ़लसफ़ी भी कोई कर न पाएगा साबित
कि कर्बला का सफ़र बे-सबब हुसैन का है
ये सोचकर निकल आए अदू की सफ़ से हुर्र
निसार होना है जिस पर, वो रब हुसैन का है
न जानता था ये बुज़दिल यज़ीद का लश्कर
कि घर लुटाने का जज़्बा ग़ज़ब हुसैन का है
ग़म-ए-हुसैन इबादत से कम नहीं यारो!
हमारे ख़ून का हर क़तरा अब हुसैन का है
ख़ुदा के सामने मातम-कुनाँ थीं हूरें भी
कि शीरख़्वार तलक जाँ-ब-लब हुसैन का है
यज़ीद व शिम्र की तुरबत भी बे-निशाँ ठहरी
अजम हुसैन का देखो, अरब हुसैन का है
हुए शहीद यहाँ तिश्ना-लब मगर नाज़ाँ
वहाँ तो कौसर व तस्नीम सब हुसैन का है
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जबीं नाज़ाँ
नई दिल्ली

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