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पहनी हैं वह, जम्पर-शल्वार, ईद के दिन : ईद पर विचित्र और विशेष ग़ज़ल

पहनी हैं वह, जम्पर-शल्वार, ईद के दिन : ईद पर विचित्र और विशेष ग़ज़ल


Eid ke din Eid par gazal shayari


ईद के मौके पर विचित्र और विशेष ग़ज़ल

Eid ke din Eid par gazal shayari


पहनी हैं वह, जम्पर-शल्वार, ईद के दिन!!
सुर्ख़ हुए, उन के " रूख़सार, ईद के दिन!!

एक महीना, मुश्किल से, करे है, ये, सब्र!?
मर्द करे है, क्यों? " यलग़ार ", ईद के दिन!!

जश्न मनाओ, सब के साथ, ख़ुश रहो तुम!!
देती है, छुट्टी, हर सरकार, ईद के दिन!!

दीजिए " ईदी ", बीवी-बच्चों को, बराबर!!
कीजिए, औलादों से " प्यार ", ईद के दिन!!

" ईद" मनायेंगे, मिल-जुल के, हम सभी लोग!!
" तू ", मेरे घर आना, ऐ यार!, " ईद" के दिन!!

अब तो है तहज़ीब-ए-नव!, है नया ज़माना!!
" लोग " नज़र आयें, " सरशार ", ईद के दिन!!

अब के, बिगाड़ेगे, " माहौल", दुश्मन-ए-जाँ!!
हम पे करेंगे ही " यलग़ार ", " ईद के दिन!!
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नोट :- इस त़वील ग़ज़लके दीगर शेर-व-सुखन आइंदा फिर कभी पेश किए जायेंगे, इन्शा-अल्लाह!
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रामदास प्रेमी इन्सान प्रेमनगरी, 
डाक्टर जावेद अशरफ़ कैस फैज अकबराबादी बिल्डिंग्, ख़दीजा नरसिंग, राँची हिल साईड, इमामबाड़ा रोड, राँची, झारखण्ड, इन्डिया!

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