जिंदगी की सच्चाई शायरी | जिंदगी क्या है शायरी
क़व्वाली
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
जिन्दगी से मुहब्बत न करना।
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
जिन्दगी से मुहब्बत न करना।
कहकशाँ भी है यह गुलसिताँ भी।
शादमानी भी, दर्द ए निहाँ भी।
कोई समझा न समझेगा इस को।
ख़ाक भी है यह है आसमाँ भी।
इस से हरगिज़ भी हरकत न करना।
ख़ाक भी है यह है आसमाँ भी।
Zindagi shayari in hindi
रूठ जाती है हँसते ही हँसते।इस से हरगिज़ भी हरकत न करना।
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
ज़िन्दगी से मुहब्बत न करना।
ज़िन्दगी से मुहब्बत न करना।
किस क़दर मुस्कुराती है पल-पल।
बहती नदिया सी करती है कल-कल।
थम भी जाती है चलते ही चलते।
पहलू अपने बदलती है हर पल।
जिंदगी का सफर शायरी
संग दिल बेमुरव्वत है यह तो।
इस से उल्फ़त की हसरत न करना।
इस से उल्फ़त की हसरत न करना।
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
ज़िन्गी से मुहब्बत न करना।
किस क़दर शौख़ बिजली सी है यह।
तीरगी में भी उजली सी है यह।
इस के अन्दाज़ क्या पूछते हो।
एक रंगीन तितली सी है यह।
Bewafa zindagi shayari
मशविरा है कभी आप इस से।
दिल लगाने की जुर्रत न करना।
दिल लगाने की जुर्रत न करना।
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
ज़िन्दगी से मुहब्बत न करना।
ख़ामशी भी है आवाज़ भी है।
गीत भी है यह इक साज़ भी है।
क्या बतायें तुम्हें हम फ़राज़ अब।
यह अ़याँ भी है और राज़ भी है।
बेवफ़ा है दग़ाबाज़ है यह।
इसकी हरगिज़ भी मिदहत न करना।
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
भूल कर भी यह ग़फ़लत न करना।
ज़िन्दगी से मुहब्बत न करना।
सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ मुरादाबाद

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